फूलों की घाटी में सैलानियों की संख्या में कमी, स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर

विश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को आज से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी घाटी को 1 जून को पर्यटकों के लिए खोला गया था और 31 अक्टूबर को निर्धारित अवधि पूरी होने पर इसे औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया।

इस वर्ष 15,924 देशी और विदेशी पर्यटकों ने घाटी का दीदार किया, जिनमें 416 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। पार्क प्रशासन को इससे 33 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पर्यटकों की संख्या और राजस्व दोनों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में घाटी में 19,401 पर्यटक पहुंचे थे, जिससे विभाग को 39 लाख रुपये से अधिक की आय हुई थी।

समय से पहले बर्फबारी बनी आकर्षण का केंद्र

इस बार घाटी में समय से पहले बर्फबारी हुई, जिसके कारण फूलों की बहार जल्दी समाप्त हो गई। हालांकि, बर्फ से ढकी घाटी का दृश्य पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं रहा। चारों ओर फैली सफेद चादर और बर्फ से ढकी पहाड़ियों ने घाटी को और भी मनमोहक बना दिया।

स्थानीय टूर ऑपरेटर संजय सती के अनुसार, ‘समय से पहले बर्फबारी के चलते कई पर्यटक केवल बर्फ का आनंद लेने घाटी पहुंचे।’ वहीं, वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि ‘बर्फबारी के बाद भी प्रतिदिन औसतन 8 से 10 पर्यटक घाटी पहुंच रहे थे।’

मुख्य आंकड़े

वर्ष                           कुल पर्यटक                विदेशी पर्यटक              विभागीय आय
2025                            15,924                           416                            ₹33 लाख+
2024                           19,401                                                              ₹39 लाख+

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान, उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। जून से अक्टूबर तक यहां सैकड़ों दुर्लभ प्रजातियों के फूल खिलते हैं, जो दुनियाभर के प्रकृतिप्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

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