गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (पंतनगर) और थल सेना, उत्तर भारत एरिया के बीच मंगलवार को एक समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता मुख्य रूप से मिलेट्स (सुगंधित व पौष्टिक अनाज) के क्षेत्र में शोध, उत्पादन और सामरिक उपयोग के लिए किया गया है।
गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर एवं थल सेना उत्तर भारत एरिया के मध्य मंगलवार को एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया। भारतीय थल सेना की ओर से केन्द्रीय कमाण्ड के जी.ओ.सी. लेफ्टिनेंट जनरल अनिन्द्य सेन गुप्ता (पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम), उत्तर भारत एरिया के जी.ओ.सी. ने लेफ्टिनेंट डी.जी. मिश्रा एवीएसएम, जीओसी उत्तर भारत एरिया, ब्रिगेडियर विक्रमजीत सिंह, कर्नल जतिन ढिल्लों आदि अधिकारियों ने विश्वविद्यालय भ्रमण करते हुए कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों के साथ बैठक की गयी।
बैठक में कुलपति द्वारा श्रीअन्न की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उनके लाभों से अवगत कराया गया तथा भारतीय सेना ने श्रीअन्न के प्रयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय स्तर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने समझौते के अनुरूप भारतीय सेना में श्रीअन्न के प्रति जागरूकता कार्यक्रम एवं शेफ कैडर को प्रशिक्षण दिए जाने तथा सेना की आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन तकनीकों का विकास कर सेना को उपलब्ध कराए जाने के लिए कहा गया। उन्होंने इस संबंध में एक तृृतीय पक्ष से वृहद परियोजना तैयार कर वित्त पोषण के लिए प्रयास किए जाने पर जोर दिया। बैठक के दौरान सेना के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यलाय ने श्री अन्न से तैयार व्यंजनों यथा मंडुआ की लस्सी, मंडुआ की आईसक्रीम, मंडुआ की बर्फी, मंडुआ का सूप, झिंगौरे की खीर, नमकीन आदि का सेवन करते हुए उनके स्वाद एवं गुणवत्ता की सराहना की गयी। बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल अनिन्द्य सेन गुप्ता ने विश्वविद्यालय के व्यंजनों की गुणवत्ता एवं विश्वविद्यालय शोध कार्यों की सराहना करते हुए भारतीय सेना के लिए शीघ्र जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने के लिए कहा गया।
बैठक में विश्वविद्यालय की ओर से संयुक्त निदेशक शोध डा. पी.के. सिंह, डा. धीरेन्द्र सिंह, डा. अनिल कुमार, डा. प्रभाकरण, डा. एस.के. शर्मा, डा. श्वेता राय, डा. अर्चना कुशवाह आदि वैज्ञानिकों ने प्रतिभाग करते हुए तकनीकी जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त निदेशक शोध डा. पी.के. सिंह ने किया।