राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को संबोधित किया। उनके प्रवास की शुरुआत हरिद्वार से हुई, जहाँ उन्होंने आध्यात्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में हिस्सा लिया। इसके बाद वे नैनीताल पहुँचीं, जहाँ उन्होंने बाबा नीम करौरी महाराज के दर्शन कर देश और राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरा (2 से 4 नवंबर 2025) धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस दौरे ने न केवल राज्य की आध्यात्मिक धरोहर को राष्ट्रीय पटल पर उजागर किया, बल्कि शिक्षा और विकास के क्षेत्र में भी प्रेरणादायक संदेश दिए।

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने प्रवास की शुरुआत हरिद्वार से की, जहां उन्होंने पतंजलि विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक उत्कृष्टता, बल्कि मानवीय मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया
उन्होंने कहा कि “ज्ञान तभी सार्थक है जब उसका उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए किया जाए।” राष्ट्रपति ने स्वामी रामदेव और पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि योग और आयुर्वेद भारत की प्राचीन धरोहर हैं, जो आज वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान बन चुकी हैं।
दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति देहरादून पहुँचीं, जहाँ उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा को संबोधित किया। अपने प्रेरणादायक भाषण में उन्होंने राज्य सरकार की विकासपरक नीतियों और पहलों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड न केवल “देवभूमि” है, बल्कि यह देश के जल, जंगल और जीवन का प्रतीक भी है। राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड के लोगों की सरलता, सेवा-भाव और प्रकृति के प्रति सम्मान इस राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में राज्य के प्रयासों को सराहा और कहा कि केंद्र व राज्य मिलकर उत्तराखंड को विकास के नए शिखर पर ले जा सकते हैं।
तीसरे दिन राष्ट्रपति मुर्मु ने कुमाऊँ क्षेत्र का रुख किया। नैनीताल पहुँचकर उन्होंने माँ नयना देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद वे प्रसिद्ध कैंची धाम पहुँचीं, जहाँ उन्होंने बाबा नीम करौरी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। राष्ट्रपति की यह यात्रा धार्मिक और भावनात्मक रूप से विशेष रही, क्योंकि बाबा नीम करौरी महाराज का आश्रम न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी आस्था का केंद्र है।

दौरे के अंतिम पड़ाव पर राष्ट्रपति मुर्मु ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि “भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है,” और इसीलिए शिक्षा में न केवल रोजगार बल्कि जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का समावेश होना चाहिए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह दौरा उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय रहा। तीन दिनों में उन्होंने आध्यात्मिकता, संस्कृति और शिक्षा तीनों के संतुलन का एक सुंदर संदेश दिया, जिससे देवभूमि के लोगों के हृदय में नई ऊर्जा और गर्व का संचार हुआ।